Aug 25 2010
ग़ज़ल
फलक पे झूम रही सांवली घटाएं हैं
लगी चमकने हृदय में भी क्षण प्रभाएं हैं
वो मुझ से मिलने था आया मगर ना मिल पाया
उसी के गम में उदासी भरी दिशाएं हैं
वो पास था ना जाना उसे, मगर अब वो
चला गया तो लहू रो रही वफाएं हैं
हैं बेवफाई के चर्चे तो उसके हर सूं अब
बुझे चिराग़ हैं, रोती हुई हवाएं हैं
वतन को छोड़ के बेटा हुआ है परदेशी
उदास मां है मगर लब पे बस दुआएं हैं
नसीब में है 'सुधा' पान कब यहाँ सब के
गरल को पी के भी जीने की बस सजाएँ हैं
लगी चमकने हृदय में भी क्षण प्रभाएं हैं
वो मुझ से मिलने था आया मगर ना मिल पाया
उसी के गम में उदासी भरी दिशाएं हैं
वो पास था ना जाना उसे, मगर अब वो
चला गया तो लहू रो रही वफाएं हैं
हैं बेवफाई के चर्चे तो उसके हर सूं अब
बुझे चिराग़ हैं, रोती हुई हवाएं हैं
वतन को छोड़ के बेटा हुआ है परदेशी
उदास मां है मगर लब पे बस दुआएं हैं
नसीब में है 'सुधा' पान कब यहाँ सब के
गरल को पी के भी जीने की बस सजाएँ हैं