Archive for November, 2010

Nov 13 2010

आप से कुछ साँझा करना चाहती हूँ ..

गर्भनाल के नवम्बर अंक में बी.बी.सी के हिंदी विभाग की पूर्व अध्यक्ष एवं साहित्यकार अचला शर्मा

से मेरी बातचीत पढ़ें |


लिंक है -- www.garbhanal.com



'' कथाबिम्ब'' पत्रिका के जुलाई -सितम्बर
अंक 2010  में आप मेरी कहानी '' फन्दा क्यों..'' पढ़ें |


लिंक है - www.kathabimb.com/

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Nov 05 2010

अद्भुत कृति हूँ मैं

Published by admin under रचना

कुम्हार की
अद्भुत कृति हूँ मैं,
उसी माटी से
उसने मुझे घड़ा है,
जिस माटी में एक दिन
सब को मिट जाना है |


नन्हें से दीप का आकार दे
आँच में तपा कर
तैयार किया है मुझे
अँधेरे को भगाने |


फिर छोड़ दिया
भरे पूरे संसार में
जलने औ' जग रौशन करने |


हूँ तो नन्हा दीया
हर दीपावली पर जलता हूँ |
निस्वार्थ, त्याग, बलिदान
का पाठ पढ़ाता हूँ |
संसार में रौशनी बांटता
मिट जाता हूँ |

सुबह
मेरे आकार को
धो- पौंछ कर
सम्भाल लिया जाता है,
अगले साल जलने के लिए |
शायद यही मेरी नियति है |

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