Jun 26 2008

क्या पाया…….

Published by admin at 7:21 pm under क्या पाया.......

क्या पाया.......

खुशियाँ ढूंढने चले
ग़म राह में गड़े थे.
ग़मों को चुन कर हटाया
दर्द साथ ही खड़े थे.
दर्द से रिश्ता जोड़ा
आंसू झर-झर झड़े थे.
आंसुओं को जब समेटा
दिन जीवन के कम पड़े थे.

डॉ. सुधा ओम ढींगरा

3 Responses to “क्या पाया…….”

  1. ila_prasad1on 30 Jun 2008 at 2:52 am

    वो गाना याद आया “घर से चले थे हम तो खुशी की तलाश में \ गम राह में खड़े थे , वो ही साथ हो लिए।” आपकी कविता उससे आगे जाती है।
    इला

  2. Vaishalion 08 Aug 2008 at 9:12 pm

    It’s really very nice , and very true ,

  3. Dr. A. S. Kajalon 05 Aug 2010 at 7:52 am

    Respected Madam Dr. Sudha Om Dhingra,
    It is a very important literatery work that you are doing through “Hindi Chetna”at international leval. Myself willing to contribute some Article/Kahani for Hindi Chetna”
    Thanking You,
    Dr. A. S. Kajal
    Associate Professor in Hindi, Dept of Law,
    M.D.University Rohtak (Haryana)
    Ph.01262-39-3407
    01262-272436

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